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विश्व स्वास्थ संगठन ने भी माना - कुंभ मेले और चुनाव की वजह से भारत में फैला है कोरोना।

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नई दिल्ली: भारत में कोरोना वायरस के मामलों में शुक्रवार को कुछ गिरावट देखने को मिली. हालांकि, अब भी नए मामले साढ़े तीन लाख के आसपास बने हुए हैं, जो चिंता का विषय बना हुआ है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से आज सुबह जारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत में पिछले 24 घंटे में COVID-19 के 3,43,144 नए मामले दर्ज किए गए. इस दौरान, 4000 मरीजों की घातक वायरस की वजह से मौत हुई. नए मामले दर्ज होने के साथ देश में कोरोना संक्रमितों की तादाद बढ़कर 2 करोड़ 40 लाख के पार चली गई है. मृतकों का आंकड़ा 2.62 लाख के ऊपर पहुंच गया है.

संयुक्त राष्ट्र के विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी माना है कि इन्हीं आयोजनों ने दूसरी लहर को तेज़ी दी है.

पांच राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव हो या फिर कुंभ मेले का आयोजन, लाखों की भीड़ में लोग एक दूसरे से सटे जा रहे थे. उत्तर प्रदेश के पंचायत चुनाव के बाद तो राज्य के ग्रामीण इलाकों पर भी कोरोना का कहर देखने को मिला.

दरअसल, WHO ने मंगलवार को कोरोना महामारी पर अपना साप्ताहिक अपडेट जारी किया है. इस अपडेट में भारत में कोरोना की दूसरी लहर फैलने के कई कारण दिए गए. जिसमें कोरोना के नए वैरिएंट का तेज़ी से फैलना, धार्मिक और राजनीतिक आयोजनों में लोगों का मेल-जोल होना, और कोरोना से जुड़े नियमों का पालन न करना शामिल है.

WHO ने किसी आयोजन का नाम तो नहीं लिया, लेकिन जब अप्रैल महीने में कोरोना और स्वास्थ्य सुविधाओं के आभाव में लोग मर जा रहे थे तब देश में चुनाव और कुंभ मेला आयोजित करवाए जा रहे थे.

पिछले साल जब भारत में कोरोना महामारी आने का अंदेशा था तो प्रधानमंत्री मोदी ‘नमस्ते ट्रम्प’ का आयोजन करवा रहे थे. इस साल जब दूसरी लहर आई तब भी उनके समेत केंद्रीय मंत्रियों और भाजपा शासित प्रदेश के मुख्यमंत्रियों ने चुनावी आयोजनों में जमकर रैलियां की.

दूसरे दलों के नेताओं ने भी रैलियां की, लेकिन सरकार कोरोना माहमारी की गंभीरता को देखते हुए चुनाव आयोग से चुनाव टालने पर बात कर सकती थी.

सबसे बड़ी बात, जिस ऑक्सीजन और अस्पताल में बेड की कमी से लोग मर जा रहे थे उसका पहले ही प्रबंध कर सकती थी. ऐसा होता तो कई लोग बच जाते, अस्पतालों को हाई कोर्ट में जाकर आपात स्थिति में ऑक्सीजन की मांग नहीं करनी पड़ती.

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हमने देश में सफल पोलियो टीकाकरण किया पर मोदी सरकार वैक्सीन नहीं दे पा रही: लालू प्रसाद यादव

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पटना: देश में जारी कोरोना वैक्सीनेशन अभ‍ियान को लेकर राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादवने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है. लालू ने 1996-97 के पोलियो टीकाकरण अभ‍ियान से इसकी तुलना करते हुए कहा है कि आज सरकार पैसे लेकर भी कोरोना का टीका उपलब्ध नहीं करा पा रही है. लालू यादव ने कहा, '1996-97 में जब हम समाजवादियों की देश में जनता दल की सरकार थी, जिसका मैं राष्ट्रीय अध्यक्ष था, तब हमने पोलियो टीकाकरण का विश्व रिकॉर्ड बनाया था.

उस वक्त आज जैसी सुविधा और जागरुकता भी नहीं थी, फिर भी 07 दिसंबर 1996 को 11.74 करोड़ शिशुओं और 18 जनवरी 1997 को 12.73 करोड़ शिशुओं को पोलियो का टीका दिया गया था. वह भारत का विश्व रिकॉर्ड था. उस दौर में वैक्सीन के प्रति लोगों में हिचकिचाहट व भ्रांतियां थीं, लेकिन जनता दल नीत संयुक्त मोर्चा की समाजवादी सरकार ने दृढ़ निश्चय किया था कि पोलियो को जड़ से ख़त्म कर आने वाली नस्लों को इससे मुक्ति दिलायेंगे.

राजद सुप्रीमो ने कहा, आज दुःख होता है कि तथाकथित विश्वगुरु सरकार अपने नागरिकों को पैसे लेकर भी टीका उपलब्ध नहीं करा पा रही है. मैं प्रधानमंत्री से आग्रह करता हूं कि इस जानलेवा महामारी में सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम के तहत पूरे देशवासियों को निःशुल्क टीका देने का ऐलान करें. लालू यादव ने यह भी कहा कि राज्य और केंद्र के टीके की क़ीमत अलग-अलग नहीं होना चाहिए. राज्यों से ही देश बनता है. ये केंद्र की ज़िम्मेदारी है कि देश के प्रत्येक नागरिक का चरणबद्ध समुचित टीकाकरण मुफ़्त में हो.

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बिहार: जलाने को लकड़ियां नहीं तो लोग नदी में फेंक रहे शव, बक्सर के गंगा घाट पर लाशों का अंबार

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बक्सर: कोरोना महामारी संकट के बीच बिहार के बक्सर जिले में इंसानियत को शर्मशार करने देनी वाली तस्वीर सामने आई है. चौसा के महदेवा घाट पर लाशों का अम्बार लग गया है. जिला प्रशासन ने पल्ला झाड़ते हुए कहा कि ये उत्तर प्रदेश की लाशें हैं, जो यहां बहकर आ गई है. कोरोना काल में बक्सर जिले के चौसा के पास स्थित महादेव घाट की तस्वीरों ने उस समय विचलित कर दिया, जब लाशों के अम्बार ने गंगा में स्थित घाट को ढक दिया.

चौसा के बीडीओ अशोक कुमार ने बताया कि ये करीब 40 से 45 लाशें होंगी, जो अलग अलग जगहों से बहकर महदेवा घाट पर आ कर लग गई हैं. उन्होंने बताया कि ये लाशें हमारी नहीं हैं. हम लोगों ने एक चौकीदार लगा रखा है, जिसकी निगरानी में लोग शव जला रहे हैं. ऐसे में ये शव उत्तरप्रदेश से बहकर आ रहे हैं और यहां पर लग जा रहे हैं. अधिकारी ने कहा कि यूपी से आ रही लाशों को रोकने का कोई उपाय नहीं है. ऐसे में हम इन लाशों के निष्पादन की तैयारी में है.

कोरोना संक्रमण से मरने वालों की लाशें परिजन लेने कोे तैयार नहीं है। ऐसे में प्रशासन कोविड नियमों का पालन करते हुए लाशों का अंतिम संस्कार करवाती है लेकिन बक्सर में गंगा नदी में जिस तरह से 100 से ज्यादा लाशें उतराती हुई नजर आ रही है, वो अमानवीय तो है ही, सरकारी इंतजामों की पोल भी खोल रहा है।

यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीनिवास बी वी ने एक न्यूज चैनल के वीडियो क्लिप को ट्वीटर पर साझा किया है, जिसमें साफ तौर पर दिख रहा है कि लाशें गंगा नदी में तैर रही हैं और हिलोरों के साथ साथ ये पानी के उपर आ जा रही हैं।

जाहिर तौर पर ये शासन और प्रशासन की जवाबदेही है कि ऐसे लाशों का ठीक तरीके से क्रियाकर्म हो जाना चाहिए लेकिन सरकारी तंत्र इस पर ध्यान नहीं दे रहा और लाशों को जलाने के नाम पर बड़े पैमाने पर घोटाले की बू आने लगी है यानी आपदा में भी अवसर तलाश लिया गया है।

वहीं एक दूसरा तथ्य यह भी निकल कर सामने आ रहा है कि सरकार आंकड़ों से खेल रही है। कई लोगों का मानना है कि कोरोना वायरस से मरने वालों की संख्या जानबूझ कर घटा कर बताई जा रही है।

कई दिनों से श्मशान में जलने वाली चिताओं से सरकारी झूठ का पर्दाफाश हो रहा था, ऐसे में लाशों को नदी में फेंकने की तरकीब अपनाई गई है।

मालूम हो कि बक्सर बिहार और यूपी का बॉर्डर भी है, इसलिए ये लाशें इन्हीं दोनों राज्यों में से कहीं की होंगी !

बक्सर में गंगा नदी के किनारे बसे इलाकों के लोगों का ये दृश्य देखकर जीना दूभर हो गया है। स्थानीय लोग बता रहे हैं कि गंगा नदी के आसपास का नजारा बेहद वीभत्स हो गया है।

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अमेठी के युवक ने बीमार दादाजी के लिए मांगी मदद तो पुलिस ने कर दिया केस!

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अमेठी: कोरोना की इस महामारी में यूपी के योगी सरकार का आतंक अब आम आदमी के लिए कहर बनता जा रहा है.

अमेठी के एक युवक ने अपने बीमार दादाजी के लिए ट्वीटर पर ऑक्सीजन की गुहार लगाई तो बजाय उसकी मदद करने के उसे कानूनी पचड़े में उलझा दिया गया. अमेठी के रहने वाले शशांक यादव नामक युवक ने ट्वीटर पर अपने कोरोना पीड़ित दादाजी के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर की मदद की अपील की थी.

कायदे से सरकार को इस युवक की मदद करनी चाहिए थी लेकिन उन्होंने शशांक यादव पर अफवाह फैलाने की प्राथमिकी दर्ज करा दी गई.
पुलिस ने यह दावा किया है कि शशांक यादव झूठी और भ्रामक जानकारी फैला रहा था.

रामगंज पुलिस स्टेशन के सब इंस्पेकटर वीरेंद्र सिंह ने कहा कि यूपी सरकार को बदनाम करने के लिए इस युवक के अपने दादाजी को कोरोना होने और ऑक्सीजन आपूर्ति नहीं होने की गलत बात ट्वीटर पर डाली. पुलिस का यह भी कहना है कि इस युवक के ट्वीट के कारण सरकार की बदनामी हुई.

पुलिस का कहना है कि उक्त युवक के दादाजी को न तो कोरोना की समस्या थी और न हीं उन्हें ऑक्सीजन सिलेंडर की जरुरत थी.
हालांकि शशांक के दादाजी की मृत्यु भी होे गई लेकिन पुलिस का साफ तौर पर कहना है कि उनकी मृत्यु कोरोना की वजह से नहीं बल्कि हार्ट अटैक की वजह से हो गई.

यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीनिवास बीवी ने इस मुद्दे को ट्वीटर पर उठाया है और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को लपेटा है. श्रीनिवास ने कहा है कि “यूपी में अपने दादाजी के लिए ऑक्सीजन मांगने वाले युवक पर पुलिस केस दर्ज करा दिया गया है. शर्म कीजिए स्मृति ईरानी जी”

मालूम हो कि यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ लगातार दावे कर रहे हैं कि हमारे राज्य में ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है. आश्चर्य की बात तो यह है कि यूपी में ऑक्सीजन की कमी से लगातार मौतें हो रही हैं लेकिन मुख्यमंत्री के दावे में कोई कमी नहीं आ रही है.

अब ऐसे में ऑक्सीजन मांगने वालों पर पुलिसिया कार्रवाई आम आदमी की आवाज दबाने की कवायद लगती है.

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कोरोना की रफ्तार ने बिगाड़े देश की हालात, आ गया है नेशनल लॉकडाउन का वक्त!

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भारत में जिस दोगुनी रफ्तार से कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़ रही है जिससे देश के अस्पतालों पर दबाव भी बढ़ने लगा है. इस बीच देश के विभिन्न राज्यों से लगातार सरकार को नए सुझाव आना शुरू हुए है, क्या देश एक बार फिर नेशनल लॉकडाउन के तरफ जा रहा हैं? क्योंकि कई राज्य अपने यहां संपूर्ण या मिनी लॉकडाउन पहले ही लगा चुके हैं, लेकिन कोरोना के हालात संभल नहीं रहे हैं. ऐसे में संपूर्ण लॉकडाउन को लेकर एक्सपर्ट्स की क्या राय है-

PHFI बेंगलुरु के प्रोफेसर गिरिधिर बाबू का कहना है कि उन्हें नहीं लगता कि नेशनल लॉकडाउन कोई रास्ता है, क्योंकि हम इस वायरस के फैलने के तरीके को नहीं समझ पा रहे हैं. हमें समझना होगा कि एपिसेंटर्स क्या हैं. जैसे कर्नाटक में बेंगलुरु है, ऐसे में पूरे राज्य पर लॉकडाउन लगाना सही नहीं होगा.

प्रो. गिरिधर ने कहा कि हम कंटेनमेंट जोन में सफल नहीं हो पाए हैं, लॉकडाउन शहर या जिला स्तर पर ठीक है. हमें नंबर घटाने पर जोर देना चाहिए, ताकि अस्पतालों पर बोझ कम हो. लॉकडाउन से सिर्फ स्पीड कम होगी, लेकिन कंटेनमेंट मदद करेगा.

धीमी पड़ी वैक्सीनेशन की रफ्तार’
कर्नाटक सरकार की कोविड टास्क फोर्स के सदस्य डॉ. विशाल राव का कहना है कि लॉकडाउन आपको तैयारी का वक्त देता है, लेकिन लॉकडाउन के लिए भी तैयारी जरूरी है. अभी ऑक्सीजन डिमांड डबल हो गई है, कर्नाटक में लॉकडाउन का एक बड़ा संकेत भी है. लॉकडाउन के दौरान वैक्सीनेशन की रफ्तार भी धीमी पड़ सकती है, ऐसे में रणनीति में बदलाव की जरूरत है.

‘दिहाड़ी की कमाई करने वालों पर सीधा असर’
नई दिल्ली के डॉ. शाहिद जमील का मानना है कि नेशनल लॉकडाउन लगाने से कोई हल नहीं निकलेगा. जहां कोरोना का कहर ज्यादा है, वहां पर पाबंदी की जरूरत है. हमने देखा कि नेशनल लॉकडाउन से पिछली बार क्या हालर हुआ था. ऐसे में लोगों की रोजी-रोटी का भी ध्यान रखना जरूरी है. लॉकडाउन का सीधा असर दिहाड़ी की कमाई करने वाले लोगों पर पड़ता है.

डॉ. शाहिद ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में वैक्सीनेशन की रफ्तार धीमी हुई है, नया स्ट्रेन भी तेजी से फैल रहा है. इस वक्त हेल्थकेयर सिस्टम पर बड़ा भार बन रहा है. इस वक्त राजनेताओं को उदाहरण सेट करना होगा.

मुंबई में केयर रेटिंग्स के चीफ इकोनॉमिस्ट मदन सबनवीस का कहना है कि जब पिछली बार नेशनल लॉकडाउन था, तब काफी कम केस थे. लॉकडाउन लगाने का भी एक तरीका है, लेकिन सरकार के पास लोगों को राहत देने का दूसरा उपाय नहीं है. हमें उम्मीद करनी चाहिए कि लोकल लॉकडाउन कोरोना की चेन को तोड़ें.

गौरतलब है कि कोरोना की रफ्तार बेकाबू होने की वजह से कई राज्यों ने अपने स्तर पर पाबंदियां लगाई हैं. दिल्ली, महाराष्ट्र, कर्नाटक, राजस्थान ने 15-15 दिनों की पाबंदी लगा दी. यूपी-एमपी में वीकेंड लॉकडाउन और नाइट कर्फ्यू लगाया गया है. ऐसे में नेशनल लॉकडाउन की भी अटकलें लगाई जा रही थीं.

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KKR के पैट कमिंस ने ऑक्सीजन संकट के लिए दिए 37 लाख रुपये

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IPL 2021: आस्ट्रेलियाई खिलाड़ी और IPL में कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के तेज गेंदबाज पैट कमिंस (Pat Cummns) ने भारतीय अस्पतालों में आक्सीजन की आपूर्ति के लिये ‘पीएम केयर्स फंड' में 50,000 डॉलर (लगभग 37 लाख रुपये) दिये. इस तरह पैट कमिंस ने पीएम केयर्स फंड में यह पैसा ऑक्सीजन की आपूर्ति के लिए लगाने के उद्देश्य से दिया है और बाकी क्रिकेटर साथियों से भी आगे आने की अपील की है. पैट कमिंस के इस कदम की एक्टर सिद्धार्थ ने जमकर तारीफ की है और ट्वीट पर लिखा है, 'अब तक का सबसे शानदार इंसान.'

पैट कमिंस ने अपने ट्विटर पर एक पोस्ट डाली है और उसमें लिखा है, 'इस समय एक बहस यह भी चल रही है कि जब कोविड संक्रमण इतनी तेजी से बढ़ रहा है ऐसे में आईपीएल करवाना सही है. मैं भारत सरकार से कहना चाहूंगा कि जब आबादी लॉकडाउन में है और आईपीएल लोगों को कुछ मनोरंजन मुहैया करा रहा है और वह बी इस मुश्किल घड़ी में. बतौर खिलाड़ी हमारे यह प्लेटफॉर्म है जिसके जरिये हम अच्छी चीजों के लिए लोगों से जुड़ सकते हैं. इसी को ध्यान में रखते हैं मैंने पीएम केयर्स फंड में दान देने का फैसला किया है.' पैट कमिंस ने बाकी क्रिकेटरों से भी आगे आने के लिए कहा है. 

 

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