Skip to main content

स्वास्थ एवं आरोग्यम


Corona के बाद अब म्यूकोर्मोसिस से फंगल इंफेक्शन का खतरा, कर रहा आंखों पर असर

News Byte

Health News: कोविड-19 चिकित्सा जगत के लिए चैलेंज बना हुआ है. अभी इस चैलेंज से लडने के लिए सही तरीके से कमर कसी भी नहीं जा सकी है कि ऐसे में म्यूकोर्मोसिस फंगल ने चिकित्सा जगत को हैरत में डाल दिया है. ये फंगल कोविड ठीक होने के बाद मरीजों पर अटैक कर रहा है, जिससे कई मरीजों की जहां आंख की रोशनी 50 फीसदी चली गई है तो कई की नाक तक काटनी पडी है.

दरअसल ये एक प्रकार का फंगल इफेक्शन है जोकि को पहले साल में 10 से 15 मरीजों के बीच पाया जाता था लेकिन कोविड 19 के बाद से ऐसे मामलों में वृद्धि देखने को मिल रही है. ये फंगल आंख, नाक, कान, जबडा व दिमाग पर प्रहार कर रहा है. बीते 15 दिनों के भीतर करीब 18 मरीजों को राजधानी के सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती करवाया गया है जिन्हें कोविड नेगेटिव के बाद घर भेज दिया गया था लेकिन मात्र 15 दिन के भीतर उनमें फंगल इंफेक्शन हो गया. सही समय पर इलाज ना होने से कई मरीज अभी तक अपनी जान भी खो चुके हैं और अपना अंग भी. इसमें जहां आंख की रोशनी 50 फीसदी चली जाती है तो नाक और जबडे की हड्डी हट जाती है. जिससे मृत्यु दर 50 फीसदी हो जाता है.

सर गंगा राम अस्पताल के सीनियर ईएनटी सर्जन डॉ मनीष मुंजाल ने बताया कि इस बीमारी के लक्षण हैं चेहरे का सुन्न होना, नाक में ब्लाॅकेज या आंखों में सूजन व लाली और दर्द का होना है जोकि कोरोना से ठीक हुए मरीजों पर हमला करता है. उन्होंने कहा कि मृत्युदर अधिक होने से 4-5 मरीजों को अभी तक हम खो चुके हैं, जिनमें एक 32 वर्षीय युवा मरीज है. उसे कोविड हुआ था और पहले से वो शुगर का मरीज था। नाक ब्लाॅक और गाल सुन्न होने के बाद लाया गया लेकिन तब तक उन्हें एक आंख से दिखना बंद हो गया था. फंगल इंफेक्शन के चलते उनके नाक व एक आंख को निकालना पडा और अभी भी वो इस फंगल इंफेक्शन से जूझ रहे हैं.

 इस बीमारी में बुजुर्गों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचने का खतरा है क्योंकि उनकी इम्यूनिटी पाॅवर पहले से कमजोर होती है. इसके अलावा वो मरीज जिन्हें पहले से कोई बीमारी है. उनके अनुसार यह संक्रमण गन्ने के पौधे, जानवर और हवा में मौजूद है. ये संक्रमण कोरोना से ठीक हुए मरीजों पर हमला कर रहा है क्योंकि उन्हें स्टेरॉयड दिया गया हैं.

कोरोना से ठीक होने वाले लोगों को स्टेरॉयड की एक खुराक दी जाती है ताकि साइटोकिन स्टॉर्म को कम किया जा सके। इससे घातक म्यूकोर्मोसिस को शरीर में प्रवेश करने की अनुमति मिलती है.

डॉ मुंजाल ने कहा कि यह म्यूकोर्मोसिस को नाक और आंखों से मस्तिष्क तक पहुंचने की अनुमति देता है, अगर इसे डिटेक्ट नहीं किया गया तो कुछ ही दिनों में 50 फीसदी से ज्यादा मामलों में मौत का कारण बन सकता है.

कैसे फेलता है कोविड से उबरने के बाद जानलेवा फंगल

  • हवा से फैलता है फंगल
  • गन्ने के पौधे में पाया जाता है
  • बिना प्रभाव दिखाए शरीर में घुसकर अंगों को करता है बेकार
  • नाक, आंख, गाल, जबड़ा और दिमाग के हिस्सों को करता है प्रभावित
  • प्रभावित अंगों को सिर्फ सर्जरी से निकालना ही संभव
  • दिमाग मे घुसने के बाद मरीज की हो जाती है मौत

म्यूकोर्मोसिस रोग के लक्षण क्या हैं?

  • बलगम के लक्षण
  • एक तरफा चेहरे की सूजन
  • सरदर्द
  • नाक या साइनस की भीड़ 
  • नाक के पुल या मुंह के ऊपरी हिस्से पर काले घाव जो जल्दी से अधिक गंभीर हो जाते हैं
  • बुखार 

 

म्यूकोर्मोसिस रोग का निदान कैसे किया जाता है:

लैब में टिश्यू सैंपल देखकर म्यूकोर्मोसिस का निदान किया जाता है. संदिग्ध साइनस संक्रमण किसी पर होता है, तो अपने डाॅक्टर से तुरंत संपर्क करें. डाॅक्टर कफ या नाक के निर्वहन का एक नमूना एकत्र कर सकता है. त्वचा के संक्रमण के मामले में, आपका डॉक्टर संक्रमित क्षेत्र को साफ करता है. जबकि अन्य गंभीर मामलों में आपरेशन कर संक्रमित अंग को काटकर हटाया जाता है.

Read more

Winter India: आखिर क्यों पड़ती है कड़ाके की ठंड? मुंह से भाप निकलने के पीछे है साइंटिफिक वजह

News Byte
बड़ा मशहूर शेर है:
"बात जब मैं करूं,
मुंह से निकले धुंआ...
जल गया जल गया,
मेरे दिल का जहां".

क्या आपने कभी सोचा है कि ठंड में मुंह से इतनी भाप या धुंआ आखिर निकलता क्यों है? आखिर क्यों पड़ती है इतनी ठंड और क्या है मुंह से भाप निकलने की वजह है?

ठंड के पीछे छिपी है ये वैज्ञानिक वजह, इसलिए होती है सर्दी क्या है रेड अलर्ट?

दिसंबर के आते ही उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड बढ़ गई है. जहां पहाड़ी इलाकों में जबरदस्त बर्फबारी हुई है वहीं मैदानी इलाकों में कड़ाके की ठंड पड़ रही है. लेकिन क्या आप जानते हैं आखिरी इतनी ठंड क्यों पड़ती है और इसके पीछे क्या वजह है.

आइए मौसम परिवर्तन के बारे में विस्तार से जानते हैं.दीवाली के त्योहार के बाद मौसम ठंडा होने लगता है. वहीं कुछ दिनों बाद स्वेटर-जैकेट निकलना शुरू हो जाता है. इसी के बाद ही सर्दियों का मौसम की शुरुआत हो जाती है.
आपको बता दें, ऋतुओं को 4 भागों में विभाजित किया है:
1. वसंत ऋतु
2. ग्रीष्म ऋतु
3. शरद ऋतु
4. शिशिर ऋतु

जानें- क्यों पड़ती है ठंड पहले ये जान लें, जब पृथ्वी सूर्य की ओर चक्कर लगाती है तो वह थोड़ी तिरछी होती है. जिस वजह से गोलार्द्ध सूर्य की तरफ झुका रहता है, उस ज्यादा धूप मिलती है और वहां गर्मियों का मौसम आ जाता है वहीं जो गोलार्द्ध  सूर्य से उलट दिशा में झुका होता है, वहां सर्दियों का मौसम आ जाता है. ऐसा हर साल होता है. पहले गोलार्द्ध सूर्य के नजदीक होता है, सूर्य की दूसरी तरफ. इसी अनुक्रम में मौसम में बदलाव होता है.

दिसंबर में, उत्तरी गोलार्द्ध  को सीधी धूप कम मिलती है और वहां सर्दियों का मौसम होता है दक्षिण में गर्मियां का.ठंड पर रेड अलर्ट का मतलब क्या होता है? जानिए राष्ट्रीय राजधानी में पड़ रही कड़ाके की ठंड ने भले ही 1997 के बाद से 22 साल पुराना अपना रिकॉर्ड तोड़ा है, लेकिन पिछले 100 वर्षो में ऐसा केवल चार बार ही हुआ है. इसी को देखते हुए दिल्ली समेत 6 राज्यों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है.आपको बता दें. रेड अलर्ट का मतलब है खतरनाक स्थिति. जब मौसम के ज्यादा खराब होने की संभावना रहती है तो रेड अलर्ट जारी किया जाता है. इसमें भारी नुकसान होने की संभावना के बारे में बताया जाता है. ताकि स्थिति के अनुसार तैयारी की जाए और लोगों को सावधान रहने के लिए पहले ही जानकारी दे दी जाती है. इसी के अलावा मौसम विभाग  समय-समय पर  अलर्ट्स जारी करता रहता है. जिसमें रेड के अलावा ग्रीन, येलो और ऑरेंज अलर्ट होते हैं.

इसलिए निकलती है भाप बता दें कि हमारी सांस लेने की क्रिया के दौरान शरीर में कार्बन डाइऑक्साइड और पानी बनता है. यही पानी जलवाष्प के रूप में आपके फेफड़ों द्वारा वाष्पीकरण की प्रक्रिया से मुंह या नाक से बाहर निकलता है.आपको बता दें कि सांस लेने की प्रक्रिया और पाचन के दौरान आपके शरीर में जो पानी बनता है और जो पानी हम पीते हैं वो मूत्र, पसीने और वाष्पीकरण से शरीर के बाहर आता है.ये तो आप जानते ही होंगे कि इंसान के शरीर का औसत तापमान 98.6 डिग्री फेरेनहाइट यानी 37 डिग्री सेल्सियस होता है. सर्दियों में जब हम सांस छोड़ते हैं तो सांस के साथ शरीर का पानी भी बाहर निकलता है. तो जब बाहर की ठंडी हवा से मिलता है तो इसका वाष्पीकरण शुरू हो जाता है.

यह जलवाष्प जब बाहर की ठंडी हवा से मिलती है तो ये संघनित होकर पानी की छोटी-छोटी बूंदों में बादल आती है और इसका परिणाम ये होता है कि ये आपको धुएं जैसी दिखाई देती है.

 

Read more

प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY) में कैसे हो सकते हैं शामिल?

News Byte

प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY) में कैसे हो सकते हैं शामिल?

PMJJBY के टर्म प्लान में पॉलिसीधारक की मौत होने पर ही बीमा कंपनी बीमे की रकम का भुगतान करती है. प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY) एक टर्म इंश्योरेंस प्लान है. प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY) में निवेश के बाद अगर व्यक्ति की मौत हो जाती है तो तो उसके परिवार को 2 लाख रुपये मिलते हैं.

देश के हर आदमी तक जीवन बीमा का लाभ पहुंचाने के लिए केंद्र की मोदी सरकार ने 9 मई 2015 को PMJJBY शुरू की है. किसी बीमा कंपनी के टर्म प्लान का मतलब जोखिम से सुरक्षा है. टर्म प्लान में पॉलिसीधारक की मौत होने पर ही बीमा कंपनी इंश्योरेंस की रकम का भुगतान करती है. अगर पॉलिसी लेने वाला व्यक्ति समय पूरा होने के बाद भी ठीक-ठाक रहता है तो उसे कोई लाभ नहीं मिलता.

वास्तव में टर्म प्लान बहुत मामूली प्रीमियम पर जोखिम से सुरक्षा उपलब्ध कराने का बेहतरीन माध्यम है.

क्या है PMJJBY की खासियत?

प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY) में बीमा खरीदने के लिए किसी मेडिकल जांच की जरूरत नहीं है.

प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY) के तहत टर्म प्लान लेने के लिए न्यूनतम उम्र 18 साल और अधिकतम उम्र 50 साल है. इस पॉलिसी की परिपक्वता (मैच्योरिटी) की उम्र 55 साल है.प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना(PMJJBY) के तहत टर्म प्लान को हर साल रिन्यू कराना पड़ता है. इसमें अश्योर्ड अमाउंट यानी बीमा की रकम 2,00,000 रुपये है.

प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY)के लिए सालाना प्रीमियम 330 रुपये है. यह रकम आपके बैंक खाते से ईसीएस के जरिए ली जाती है. योजना की रकम में बैंक प्रशासनिक शुल्क लगाते हैं. इसके अलावा इस रकम पर GST भी लागू है.

Read more

कोरोना संक्रमण पर हैरान करने देने वाली रिसर्च, "जानलेवा" सिगरेट से बच रही जान!

News Byte

कोरोना वायरस के इलाज और बचाव को लेकर लगातार देश और दुनिया में कोशिशें की जारी है. जिसे लेकर कई तरह की रिसर्च भी सामने आई है. चीन, अमेरिका, यूरोप, इंडिया और बाकी कई देशों के वैज्ञानिकों के दावे के बीच एक नया दावा किया गया है.

हाल ही में आई एक रिपोर्ट में वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि सिगरेट पीने वालों में कोरोना का खतरा कम होता है. साथ ही अब वैज्ञानिक सिगरेट में पाए जाने वाले निकोटीन से कोरोना के इलाज की योजना बना रहे हैं. गौरतलब है कि कोरोना वायरस बड़ी तेज रफ्तार से पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले रहा है. कोरोना वायरस से बचाव के लिए अभी तक कोई वैक्सीन नहीं बन पाई है, लेकिन इन सबके बीच इस तरह के दावे वाकई में हैरान करने वाले हैं

पेरिस के एक अस्पताल में 480 मरीजों पर रिसर्च की गई. जीसमें से 350 मरीज अस्पताल में भर्ती थे, जबकि बाकी मरीजों को डिस्चार्ज कर घर भेज दिया गया था. स्टडी के दौरान देखा गया कि अस्पताल में भर्ती मरीजों की औसत उम्र 65 साल थी, जिसमें 4.4 फीसदी लोग धूम्रपान करते थे. वहीं जो लोग डिस्चार्ज होकर घर गए थे, उनकी औसत उम्र 44 साल थी, जिनमें से 5.3 फीसदी लोग नियमित धूम्रपान करते थे. वैज्ञानिकों के मुताबिक मरीजों की अनुमानित जनसंख्या के मुकाबले धूम्रपान करने वालों की संख्या कम है, यहां पर 44 से 53 साल की आयु वाले 40 फीसदी लोग धूम्रपान करते हैं, वहीं 65-75 आयु वर्ग के बीच में ये आंकड़ा 8.8 से लेकर 11.3 फीसदी है.

वैज्ञानिकों के मुताबिक सिगरेट और तंबाकू में निकोटीन पाया जाता है, ये निकोटीन वायरस को कोशिकाओं तक नहीं पहुंचने देता, जिसके संक्रमण रुक जाता है. वहीं मानव शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली अनावश्यक प्रतिक्रियाएं करती रहती है. वैज्ञानिकों का दावा है कि निकोटीन इन अनावश्यक प्रतिक्रियाओं को कम कर देता है, जिससे कोरोना से ग्रसित मरीजों को फायदा होता है.

निकोटीन के इस फायदे को देखते हुए अब वैज्ञानिक निकोटीन पैच तैयार कर रहे हैं, ताकी कोरोना के मरीजों का इलाज हो सके, हालांकि अभी फ्रांस में निकोटीन पैच के क्लीनिकल ट्रायल को मंजूरी नहीं मिली है. वहीं वैज्ञानिकों ने साफ कर दिया है कि इस स्टडी का मकसद लोगों को धूम्रपान करने के लिए प्रोत्साहित करना नहीं है. इसमें मिलने वाले निकोटीन से कोरोना वायरस से लड़ा जा सकता है. धूम्रपान से कैंसर और फेफड़े संबंधित कई बीमारियां हो सकती हैं, जो जानलेवा साबित होंगी.

Read more

दुनिया मे कोरोना वायरस से पिडितो कि संख्या लाखो के पार, भारत मे अब तक ३४ मामले

Admin

नई दिल्‍ली. दुनियाभर में कोरोना वायरस (Corona Virus) से पीड़ित लोगों की संख्या बढ़कर शनिवार को एक लाख के पार हो गई. वहीं भारत शनिवार को 3 और मामले सामने आए. अब तक भारत में कोरोना (Corona) प्रभावितों के 34 केस आ चुके हैं. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार चीन (China) से फैले इस घातक वायरस के कारण चीन से निर्यात होने वाले सामानों पर बहुत बुरा असर पड़ा है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने विषाणु का संक्रमण फैलने को ‘बेहद चिंता’ का विषय बताया. कोरोना वायरस (Corona Virus) के कारण अब तक करीब 3,500 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 92 देशों में एक लाख से अधिक लोग इससे संक्रमित हैं. इस बीच, अमेरिका एक क्रूज जहाज में इस संक्रमण को काबू करने के लिए जद्दोजहद कर रहा है जहां 21 लोगों के नमूनों की जांच के परिणाम सकारात्मक पाए गए हैं.

‘ग्रैंड प्रिन्सेस’ बुधवार से सैन फ्रांसिस्को (San Francisco) के पास फंसा हुआ है. बुधवार को पता चला था कि जहाज की पिछली यात्रा में दो लोग कोरोना वायरस (Corona Virus) से पीड़ित पाए गए हैं और इनमें से एक की बाद में मौत हो गई. अमेरिका के उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने बताया कि जहाज को इस सप्ताहांत गैर-वाणिज्यिक डॉक पर लाया जाएगा, जहां सभी 3,533 यात्रियों और चालक दल के सदस्यों की जांच की जाएगी. पेंस ने शुक्रवार को कहा, ‘जिन लोगों में कोरोना वायरस की पुष्टि हुई है, उनमें से 19 चालक दल के सदस्य तथा दो यात्री हैं.’

Read more