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कोरोना महामरी से देश और दुनिया में लगातार संक्रमण और उसकी वजह से मौत के आंकड़े बढ़ते जा रहे हैं. बीते 24 घंटे में सिर्फ भारत देश में तीन लाख 49 हजार से अधिक संक्रमण के नए मामले सामने आए हैं. यह आंकड़ा लगातार चौथे दिन का है जब भारत में कोरोना वायरस के तीन लाख से भी ज्यादा मामले सामने आए हैं. इसके साथ ही बीते 24 घंटे में 2700 से भी लोगों की मौत भी हुई है, और अब तक देश में कोरोना की वजह से एक लाख 92 हजार से अधिक लोगों की जान जा चुकी है.

क्या करें अगर कोविड मरीज का बुखार नहीं उतर रहा है तो?
दिल्ली AIMS के वरिष्ठ डॉक्टर अंजन त्रिखा जी कहते हैं की, "पिछले साल जब बुखार आता था तो 4-5 दिन के भीतर बीमारी ठीक होने लगती थी, लेकिन इस बार बीमारी 15-20 दिन तक रह रही है, बुखार 4-5 दिन बाद से आता है और 15-20 दिन तक रहता भी है. इसके लिए पहले तो पैरासिटामोल की गोली समय पर लें. 500 मिलीग्राम की गोली एक दिन में चार ले सकते हैं. इसके बावजूद बुखार रहता है तो हाइड्रोथेरेपी करना है. इसमें पानी की पट्टी माथे पर नहीं रखी जाती बल्कि गर्दन के दोनों तरफ , बांह के नीचे या जांघ के नीचे रख सकते हैं. लेकिन अगर फिर भी कम नहीं हो रहा है तो डॉक्टर की सलाह लेकर दवाई बदल सकते हैं."

सीटी स्कैन कराना कितना जरूरी है?
डॉ. अंजन त्रिखा कहते हैं की, "सीटी स्कैन बीमारी के सातवें या नौवें दिन कराना चाहिए, वो भी तब जब मरीज की स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है. सभी को समझना होगा कि सीटी स्कैन देख कर इलाज नहीं होता है, मरीज की कंडीशन देख कर इलाज होता है. अगर संक्रमण हल्का है तो सीटी स्कैन या खून जांच किसी की जरूरत नहीं है. RT-PCR की रिपोर्ट ही पर्याप्त है. लेकिन अगर ब्लड प्रेशर बढ़ गया है, खांसी आ रही है, बुखार नहीं उतर रहा, सांस फूल रही है, तब सीटी स्कैन कराते हैं, ताकि पता चले कि फेफड़े कितना प्रभावित हुए हैं."

स्टीम यानी भाप कोरोना की लड़ाई में कितना मददगार है?
डॉ. अंजन त्रिखा कहते हैं, "कोरोना के समय में ऐसी कई चीजें हैं, जिसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है. लेकिन अक्सर पहले सर्दी-जुकाम में भाप लेने से गले को आराम मिलता है और खांसी में दर्द से राहत मिलती है. कोरोना काल में भी इसे उसी तरह से प्रयोग करना है, लेकिन भाप लेने को इलाज नहीं माने, कई लोग ऐसे आए, जिन्होंने इतने गर्म पानी से भाप ले लिया कि उनके गले में अल्सर बन गया. इसलिए ज्यादा गर्म पानी या कई बार भाप लेने से बचें, कभी-कभी ले सकते हैं."

सोशल मीडिया पर कोरोना को लेकर फैल रहे भ्रमों की जानें क्या है सच्चाई!
वाट्सएप पर ऐसी कई भ्रामक जानकारियां चल रही हैं जिनको पढ़ कर लोग झांसे में आ जा रहे हैं. इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डॉ. पीके गुप्ता के अनुसार वाट्सएप, फेसबुक या ट्विटर पर चल रहे ऐसे संदेशों पर ध्यान देने की कतई जरूरत नहीं है.

क्या है भ्रम?

  • 10 सेकंड सांस रोक कर देखें। यदि खांसी नहीं आती है तो आपको संक्रमण नहीं है
  • मांस-मछली या अंडा खाने से कोरोना वायरस फैलता है, इनको न खाएं
  • पुस्तक में लिखी फलां लाइनें बार बार पढ़ने से कोरोना नहीं होता
  • नाक को सलाइन से साफ करने पर कोरोना हो भी तो बाहर आ जाता है

क्या है सच्चाई:-

  • संक्रमण है या नहीं इसका पता सिर्फ जांच से ही चलता है
  • मांस-मछली या अंडा यदि ठीक से पका कर खा रहे हैं तो दिक्कत नहीं
  • 100 डिग्री तापमान पर अच्छे से पकाने पर यदि वायरस हो भी तो मर जाता है
  • अंडे को हाफ फ्राइड न खाएं, पूरी तरह उबाल कर या पका कर ही खाएं