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नई दिल्ली: "दिल्ली चलो" मार्च के तहत शुक्रवार को जहां विभिन्न विभिन्न राज्यों से किसानों और पुलिस के बीच जोरदार संघर्ष हुआ जिसमें पुलिस ने किसानों पर पानी की बौछारें और आंसू गैस के गोले दागे वहीं किसानों ने अवरोधकों को तोड़ डाला और पथराव किया. महानगर के बाहर हजारों की संख्या में किसानों के जमे होने के कारण तनाव बना रहा. स्पष्ट रूपरेखा नहीं होने के बावजूद पंजाब के 30 संगठनों सहित कई समूहों के किसानों का संकल्प स्पष्ट है और उनमें से कुछ का कहना है कि जब तक कानून वापस नहीं लिया जाता है तब तक वे यहां से नहीं हटेंगे और कुछ किसानों का कहना है कि वे सुनिश्चित करेंगे कि उनकी आवाज सुनी जाए.

किसान मुख्यत: पंजाब और हरियाणा के हैं लेकिन मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और राजस्थान के किसान भी यहां आए हुए हैं. सिंघू और टिकरी बॉर्डर पर हजारों की संख्या में किसान ट्रकों, ट्रैक्टरों और अन्य वाहनों में पहुंचे हैं और पानी की बौछारों तथा आंसू गैस के गोले का सामना करते हुए चार दिनों से वहां जमे हुए हैं.

कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों के धरने का आज चौथा दिन है. किसान दिल्ली की सीमा पर 26 नवंबर से प्रदर्शन कर रहे हैं. किसान दिल्ली-हरियाणा की सीमा सिंधु बॉर्डर पर डटे हैं. कुछ किसान दिल्ली के निराकारी समागम मैदान में मौजूद हैं. शनिवार को किसानों ने तय किया है कि वे अभी सिंधु बॉर्डर पर ही प्रदर्शन करेंगे और बुराड़ी के निराकारी समागम मैदान में नहीं जाएंगे. इसके अलावा किसानों ने तय किया है कि वे रोजाना 11 बजे मीटिंग करेंगे और आगे की रणनीति तय करेंगे.

काफी संख्या में पुलिसकर्मियों के पहुंचने के बावजूद कई किसानों का कहना है कि वे बुराड़ी के संत निरंकारी मैदान में नहीं जाएंगे जहां उन्हें शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की अनुमति दी गई है. सड़क पर एक और रात बिताने के लिए तैयार कुछ किसानों का कहना है कि वे रविवार को होने वाली महत्वपूर्ण बैठक का इंतजार करेंगे जिसमें आगे की रूपरेखा तय होगी.

भारतीय किसान यूनियन काडिया के जालंधर इकाई के अध्यक्ष बलजीत सिंह महल ने कहा, ‘‘कल सुबह 11 बजे एक और बैठक होगी. तब तक हम सिंघू पर ही रहेंगे.'' भारतीय किसान यूनियन (राजेवाला) के अध्यक्ष बलबीर सिंह राजेवाला ने ‘पीटीआई-भाषा' को फोन पर बताया, ‘‘हमने अभी तक बुराड़ी मैदान में जाने का निर्णय नहीं किया है. शाम में हम बैठक करेंगे जिसमें आगे की रूपरेखा तय की जाएगी.''

पंजाब के सबसे बड़े किसान संगठनों में एक भारतीय किसान यूनियन (एकता-उगराहां) भी बुराड़ी नहीं जाने पर सहमत हो गया. धड़े के नेताओं ने दावा किया कि एक लाख से अधिक किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों, बसों और अन्य वाहनों में राष्ट्रीय राजधानी की तरफ मार्च कर रहे हैं. पंजाब से राजधानी में प्रवेश करने के मुख्य बिंदु सिंघू और टिकरी बॉर्डर पर किसानों की संख्या काफी बढ़ गई है.

उन्होंने कहा, ‘‘हम जंतर-मंतर पर जाना चाहते हैं और वहां शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना चाहते हैं. बैठकें हो रही हैं और अगला निर्णय होने तक हम यहां बॉर्डर पर शांतिपूर्ण तरीके से प्रशर्दन करना जारी रखेंगे.'' टिकरी पर एक अन्य किसान जगतार सिंह भागीवंदर ने कहा कि समूहों को अलग-थलग करने का प्रयास किया जा रहा है. किसान लंबे समय तक जमे रहने के लिए तैयार होकर आए हैं, उनके वाहनों में राशन, बर्तन, कंबल लदे हुए हैं और उन्होंने फोन चार्ज करने के लिए चार्जर भी साथ रखा हुआ है.

किसानों के समर्थन में मायावती
यूपी की पूर्व सीएम मायावती प्रदर्शन कर रहे किसानों के समर्थन में आ गईं हैं. उन्होंने कहा है कि केन्द्र सरकार द्वारा कृषि से सम्बन्धित हाल में लागू किए गए तीन कानूनों को लेकर अपनी असहमति जताते हुए पूरे देश में किसान काफी आक्रोशित और आन्दोलित भी हैं. इसके मद्देनजर, किसानों की आम सहमति के बिना बनाए गए, इन कानूनों पर केन्द्र सरकार अगर पुनर्विचार कर ले तो बेहतर.