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नई दिल्ली: देश में कृषि कानूनों के विरोध में पिछले 22 दिनों से दिल्ली के अलग अलग बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे किसानों के लिए केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने खुला पत्र लिखा है. आठ पन्नों के इस पत्र ने आज प्रदर्शनकारी किसानों के लिए भाजपा के बड़ी पहुंच के कार्यक्रम की शुरुआत की. पत्र एक पार्टी बैठक के बाद जारी किया गया था जिसमें उसके प्रमुख नेता केंद्रीय मंत्री अमित शाह, उनके कैबिनेट सहयोगियों पीयूष गोयल, निर्मला सीतारमण, नरेंद्र तोमर और पार्टी प्रमुख जेपी नड्डा ने भाग लिया था.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया, "कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर जी ने किसान भाई-बहनों को पत्र लिखकर अपनी भावनाएं प्रकट की हैं, एक विनम्र संवाद करने का प्रयास किया है. सभी अन्नदाताओं से मेरा आग्रह है कि वे इसे जरूर पढ़ें. देशवासियों से भी आग्रह है कि वे इसे ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं."

कृषि कानूनों को 'ऐतिहासिक' करार देते हुए तोमर ने कहा कि इन सुधारों को लेकर उनकी अनेक राज्यों के किसान संगठनों से बातचीत हुई है और कई किसान संगठनों ने इनका स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि वह इससे बहुत खुश हैं और किसानों में एक नई उम्मीद जगी है. उन्होंने ने कहा, ''देश के अलग-अलग क्षेत्रों से ऐसे किसानों के उदाहरण भी लगातार मिल रहे हैं, जिन्होंने नए कानूनों का लाभ उठाना शुरू भी कर दिया है.''

उन्होंने कहा कि इन कृषि सुधार कानूनों का दूसरा पक्ष ये है कि किसान संगठनों में एक भ्रम पैदा कर दिया गया है. उन्होंने कहा, ''देश का कृषि मंत्री होने के नाते मेरा कर्तव्य है कि हर किसान का भ्रम दूर करूं. मेरा दायित्व है कि सरकार और किसानों के बीच दिल्ली और आसपास के क्षेत्र में जो झूठ की दीवार बनाने की साजिश रची जा रही है उसकी सच्चाई और सही वस्तु स्थिति आपके सामने रखूं.''

कृषि मंत्री के 8 आश्वासन:
  1. किसानों की जमीन को खतरा नहीं, मालिकाना हक उन्हीं का रहेगा.
  2. किसानों को तय समय पर भुगतान किया जाएगा
  3. तय समय पर भुगतान नहीं करने पर जुर्माना लगेगा 
  4. खुले बाजार में अच्छे दाम पर फसल बेचने का विकल्प
  5. MSP जारी है और जारी रहेगी
  6. मंडियां चालू हैं और चालू रहेंगी
  7. करार फसलों के लिए होगा, जमीन के लिए नहीं, किसान जब चाहें करार खत्म कर सकते हैं
  8. APMC मंडियां कानून के दायरे से बाहर हैं