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भारत में जिस दोगुनी रफ्तार से कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़ रही है जिससे देश के अस्पतालों पर दबाव भी बढ़ने लगा है. इस बीच देश के विभिन्न राज्यों से लगातार सरकार को नए सुझाव आना शुरू हुए है, क्या देश एक बार फिर नेशनल लॉकडाउन के तरफ जा रहा हैं? क्योंकि कई राज्य अपने यहां संपूर्ण या मिनी लॉकडाउन पहले ही लगा चुके हैं, लेकिन कोरोना के हालात संभल नहीं रहे हैं. ऐसे में संपूर्ण लॉकडाउन को लेकर एक्सपर्ट्स की क्या राय है-

PHFI बेंगलुरु के प्रोफेसर गिरिधिर बाबू का कहना है कि उन्हें नहीं लगता कि नेशनल लॉकडाउन कोई रास्ता है, क्योंकि हम इस वायरस के फैलने के तरीके को नहीं समझ पा रहे हैं. हमें समझना होगा कि एपिसेंटर्स क्या हैं. जैसे कर्नाटक में बेंगलुरु है, ऐसे में पूरे राज्य पर लॉकडाउन लगाना सही नहीं होगा.

प्रो. गिरिधर ने कहा कि हम कंटेनमेंट जोन में सफल नहीं हो पाए हैं, लॉकडाउन शहर या जिला स्तर पर ठीक है. हमें नंबर घटाने पर जोर देना चाहिए, ताकि अस्पतालों पर बोझ कम हो. लॉकडाउन से सिर्फ स्पीड कम होगी, लेकिन कंटेनमेंट मदद करेगा.

धीमी पड़ी वैक्सीनेशन की रफ्तार’
कर्नाटक सरकार की कोविड टास्क फोर्स के सदस्य डॉ. विशाल राव का कहना है कि लॉकडाउन आपको तैयारी का वक्त देता है, लेकिन लॉकडाउन के लिए भी तैयारी जरूरी है. अभी ऑक्सीजन डिमांड डबल हो गई है, कर्नाटक में लॉकडाउन का एक बड़ा संकेत भी है. लॉकडाउन के दौरान वैक्सीनेशन की रफ्तार भी धीमी पड़ सकती है, ऐसे में रणनीति में बदलाव की जरूरत है.

‘दिहाड़ी की कमाई करने वालों पर सीधा असर’
नई दिल्ली के डॉ. शाहिद जमील का मानना है कि नेशनल लॉकडाउन लगाने से कोई हल नहीं निकलेगा. जहां कोरोना का कहर ज्यादा है, वहां पर पाबंदी की जरूरत है. हमने देखा कि नेशनल लॉकडाउन से पिछली बार क्या हालर हुआ था. ऐसे में लोगों की रोजी-रोटी का भी ध्यान रखना जरूरी है. लॉकडाउन का सीधा असर दिहाड़ी की कमाई करने वाले लोगों पर पड़ता है.

डॉ. शाहिद ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में वैक्सीनेशन की रफ्तार धीमी हुई है, नया स्ट्रेन भी तेजी से फैल रहा है. इस वक्त हेल्थकेयर सिस्टम पर बड़ा भार बन रहा है. इस वक्त राजनेताओं को उदाहरण सेट करना होगा.

मुंबई में केयर रेटिंग्स के चीफ इकोनॉमिस्ट मदन सबनवीस का कहना है कि जब पिछली बार नेशनल लॉकडाउन था, तब काफी कम केस थे. लॉकडाउन लगाने का भी एक तरीका है, लेकिन सरकार के पास लोगों को राहत देने का दूसरा उपाय नहीं है. हमें उम्मीद करनी चाहिए कि लोकल लॉकडाउन कोरोना की चेन को तोड़ें.

गौरतलब है कि कोरोना की रफ्तार बेकाबू होने की वजह से कई राज्यों ने अपने स्तर पर पाबंदियां लगाई हैं. दिल्ली, महाराष्ट्र, कर्नाटक, राजस्थान ने 15-15 दिनों की पाबंदी लगा दी. यूपी-एमपी में वीकेंड लॉकडाउन और नाइट कर्फ्यू लगाया गया है. ऐसे में नेशनल लॉकडाउन की भी अटकलें लगाई जा रही थीं.