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जयपुर: राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सचिन पायलट को निकम्मा और नकारा कहा था. इस पर सचिन पायलट का कहना है कि ''मुझे तकलीफ है कि मुझे निक्कमा, नकारा कहा गया. मैं काफ़ी आहत था. एक व्यक्ति के तौर पर मुझे बहुत दुख हुआ. पर मेरी परवरिश में मुझे हमेशा बड़ों का सम्मान करना सिखाया गया और मैं सम्मान करता रहूंगा. गहलोत जी मुझसे बहुत बड़े हैं.''

जयपुर पहुंचे सचिन पायलट ने आज कहा कि पार्टी के भीतर अपनी बातों को उठाना विद्रोह नहीं, कोई मांग नहीं की. सचिन पायलट ने कहा कि मेरे बारे में जो शब्दावली का इस्तेमाल किया गया उसे सुनकर मुझे दुख भी हुआ और तक़लीफ़ भी हुई. राजनीति में शालीनता ज़रूरी है. ख़ून का घंट पीना पड़ता है. पर इसका मतलब ये नहीं कि हम इंसान नहीं हैं. पायलट ने कहा कि कल हमारी कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल और प्रियंका जी से मुलाक़ात हुई थी. चर्चा निर्णायक और सार्थक रही. पुलिस के केस, निलंबन, कोर्ट कचहरी हुई जो मुझे लगा सकारात्मक नहीं है. हमने पहले दिन जाकर बोला था कि हम अपनी बात पार्टी के सामने रखना चाहते हैं. हमने या हमारे विधायकों ने पार्टी और पार्टी आलाकमान के ख़िलाफ़ कुछ नहीं कहा.

सचिन पायलट ने कहा कि ''मैं धन्यवाद करना चाहता हूं सोनिया जी का जिन्होंने एक कमेटी बनाई है,  इंसाफ़ होगा. मेरा व्यक्तिगत किसी से कोई इश्यू नहीं है. मैं पांच साल से ज़्यादा यहां रहा. जो मेरे साथ लोग थे उनका ध्यान रखना ज़रूरी था. जिन लोगों ने लाठी खाई, पसीना बहाया उनको सत्ता में भागीदारी दिलाना मेरा कर्तव्य है.  मैंने कहा था कि सत्य परेशान हो सकता है पर पराजित नहीं हो सकता.''

उन्होंने कहा कि ''मैंने अपने लिए कोई पद नहीं मांगा. मैंने बस यही कहा कि विधायकों के ख़िलाफ़ बदले की भावना से काम नहीं होना चाहिए. हम सब कांग्रेस के निष्ठावान कार्यकर्ता हैं. पार्टी ने बहुत पद दिए. सरकार में विपक्ष में जो पद दिया, मैंने पूरा दायित्व निभाया. पार्टी के मुखिया और नेता के तौर पर सबको साथ में लेकर मिलकर चलना पड़ता है. मेरे अंदर किसी को लेकर कोई इगो नहीं है. मेरे दिल में किसी के लिए कोई ग़ुस्सा नहीं है.''

कांग्रेस के नेता और राजस्थान के पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने कहा कि ''मुझ पर राजद्रोह की धारा लगाई गई. मैंने ऐसा क्या किया था? क्या पार्टी के भीतर सवाल उठाना राजद्रोह है? फिर शायद कोर्ट के डर से मुक़दमा वापस ले लिया.''  उन्होंने कहा कि ''मैं कहीं नहीं जा रहा हूं. मैं यहीं राजस्थान की जनता के बीच हूं और रहूंगा. राहुल जी से क्या बात हुई, वह मैं आपको नहीं बताऊंगा लेकिन उन्होंने हमारी सारी शिकायतों को सुलझाने का भरोसा दिलाया है.''

सवाल- आप अशोक गहलोत से मिलेंगे तो क्या कहेंगे? पर सचिन पायलट ने जवाब दिया कि ''मैं हमेशा उनके साथ सम्मान से मिला हूं. मुस्करा के मिलूंगा. मैंने कभी उनके ख़िलाफ़ कुछ नहीं कहा. मेरी व्यक्तिगत कोई नाराज़गी नहीं है, सब काम को लेकर बात थी.''  उन्होंने कहा कि ''सारे विधायक कांग्रेस के हैं. हमने साथ चुनाव लड़ा है और पसीना बहाया है. हमेशा पार्टी के साथ रहा हूं. मैं कोर्ट कचहरी कर रहा था अपनी सदस्यता बचाने के लिए. मेरे सारे विधायकों ने रहने खाने का बिल अपने पास से दिया है. हमने वक़ील की फ़ीस अपने पास से दी है.''