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Tag : Bihar


कोन होंगा बिहार का मुख्यमंत्री? नितीश का जवाब - NDA लेंगा फैसला

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पटना: हाल ही हुए बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद आज पहली बार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मीडिया से मुलाकात की. उन्होंने कहा कि जनता ने एनडीए को बहुमत दिया है और हम सरकार बनाएंगे. शपथ ग्रहण को लेकर उन्होंने कहा कि इसका अभी निर्णय नहीं लिया गया है कि शपथ ग्रहण छठ या दिवाली के बाद होगा. हम रिजल्ट की समीक्षा कर रहे हैं. सहयोगी चार पार्टियों के नेता कल बैठक करेंगे. उन्होंने कहा कि इसमें तीन से चार दिन का वक्त लग सकता है.

साथ ही नीतीश कुमार ने कहा कि एनडीए के चारों घटक (जेडीयू, बीजेपी, हम और वीआईपी) दलों की कल औपचारिक बैठक होगी. इस बैठक में सभी महत्वपूर्ण फैसले लिए जाएंगे.

बता दें कि 243 सीटों वाली बिहार विधानसभा में एनडीए को 125 सीटें मिली हैं. बीजेपी को 74 सीटें और जेडीयू को 43 सीटें मिलीं. वहीं, आरजेडी के हिस्से 75 सीटें आई हैं और वह बिहार की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है जबकि उसकी सहयोगी कांग्रेस पार्टी को 19 सीटें और वामपंथी दलों को 16 सीटें मिली हैं. महागठबंधन को कुल110 सीटें मिली हैं.

 

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बिहार: पुलिसवाले से उठक-बैठक कराने वाले अधिकारी पर कार्रवाई नहीं, कार्रवाई के बजाय प्रमोशन

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पटना: बिहार के अररिया जिले में कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने के लिए लागू लॉकडाउन के दौरान एक चौकीदार से कान पकड़कर उठक-बैठक कराकर वहां के कृषि पदाधिकारी मनोज कुमार एक बार फिर सुर्खियों में आ गए हैं. जिला कृषि पदाधिकारी को लॉकडाउन में सड़क पर देख चौकीदार ने उनसे पांस की मांग की, जिससे उन्‍हें गुस्‍सा आ गया. घटना का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद कार्रवाई के आश्‍वासन के बीच उनका स्थानांतरण कर उन्‍हें नई जिम्‍मेदारी दी गई है. इससे जांच की प्रक्रिया व विभागीय मंशा पर सवाल खड़े हो गए हैं.

सोशल मीडिया में वायरल हुआ था वीडियो

मामला सोशल मीडिया के माध्यम से वायरल होने के बाद सरकार ने आनन-फानन में जांच के आदेश दिए थे, लेकिन जांच के नाम पर कुछ खास नहीं हुआ. बिहार सरकार ने इस अधिकारी को स्थानांतरण के साथ ही पदोन्नति का उपहार दे दिया. एक पुलिसवाले के साथ गलत व्यवहार करने वाले इस अधिकारी पर कार्रवाई करने की बजाय सरकार की मेहरबानी और प्रमोशन मिलने से सवाल उठने लगे हैं.

कार्रवाई के बदले स्‍थानांतरण, मंशा पर खड़े हुए सवाल
चौकीदार के साथ दुर्व्‍यवहार व दबंगई के आरोपित अधिकारी, जिसके खिलाफ कार्रवाई की बात हो रही थी, को पटना स्‍थानांतरित कर नई जिम्‍मेदारी देने पर सवाल खड़े हो गए हैं. हालांकि, आरोपित अधिकारी को पहले के पद के समकक्ष पद ही दिया गया है, लेकिन इसे अनौपचारिक रूप से दंड के बदले प्रमोशन माना जा रहा है.

कृषि मंत्री ने दिए थे जांच के आदेश

बिहार सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक, जिला कृषि पदाधिकारी (अररिया) मनोज कुमार का स्थानांतरण उपनिदेशक (प्रशिक्षण कार्यालय) अपर कृषि निदेशक प्रसार पटना में किया गया है. अररिया में हुई इस घटना के बाद मामले ने तूल पकड़ा था, तो खुद विभाग के मुखिया यानी कृषि मंत्री ने भी जांच के आदेश दिए थे. उन्‍होंने 24 घंटे के अंदर कार्रवाई की बात कही थी, लेकिन जो हुआ वो सबके सामने है.

डीजीपी ने भी जताई थी नाराजगी

बिहार के पुलिस मुखिया डीजीपी ने भी अपने विभाग के एक साथी सिपाही के साथ हुई इस घटना पर गहरी नाराजगी जताई थी. मनोज कुमार अररिया में जिला कृषि पदाधिकारी के पद पर कार्यरत थे, लेकिन वहां से उनका प्रमोशन करते हुए सीधे उपनिदेशक यानी डिप्टी डायरेक्टर बनाकर पटना भेज दिया गया है.

होमगार्ड जवान के साथ हुई थी बदसलूकी

इस मामले में अररिया के कृषि पदाधिकारी के खिलाफ ऑन ड्यूटी जवान के साथ मिसबिहेव करने को लेकर अररिया थाना में एफआईआर दर्ज किया गया है. बिहार पुलिस के एडीजी मुख्यालय जितेंद्र कुमार ने बताया कि अररिया का ये मामला सोशल मीडिया के माध्यम से काफी वायरल हुआ था. इसी प्रकरण में डीजीपी द्वारा वहां मौजूद एक एएसआई गोविंद सिंह को सस्पेंड भी किया गया था.

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बिहार के 17 लाख से ज्यादा लोग दूसरे राज्यों में फंसे है, उन्हें अभी वापस लाना नामुमकिन: नीतीश सरकार

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देश में चालू लॉकडॉउन के बिच विभिन्न राज्यों में बिहार के मजदुर फसे हुए है, करीब १७ लाख के ऊपर लोग वहा फसे हुए है. जिन्हे वापिस राज्यों में लाना मुमकिन नहीं है. बिहार सरकार ने गुरुवार को हाईकोर्ट में यह जानकारी दी, राज्य सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि उन लोगों को फौरी सहायता के तौर पर भोजन, राशन और रुपये दिए जा रहे हैं.

आपदा प्रबंधक विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत ने दूसरे राज्यों में फंसे बिहार के लोग और उनको प्रदेश सरकार द्वारा दी रही मदद के बारे में हाईकोर्ट के निबंधक कार्यालय को रिपोर्ट सौंपी. बता दें कि हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजय करोल ने बिहार सरकार से जवाब मांगा था.

अपनी रिपोर्ट में बिहार सरकार ने बताया कि लॉकडाउन के नियमों और केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन किया जा रहा है. लॉकडाउन की अवधि में प्रदेश के किसी भी व्यक्ति को वापस नहीं लाया जा सकता। ऐसे लोगों को समुचित भोजन, राशन के साथ तत्काल एक-एक हजार रुपये दिए जा रहे हैं.

राज्य सरकार ने कहा कि टेलीफोन, हेल्पलाइन नंबर, मोबाइल एप बहुत पहले ही जारी कर दिए गए थे. दरअसल, कोटा में पढ़ रही बिहार की एक छात्रा के पिता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है, याचिका में कहा गया है कि छात्रा को कोटा में रहने और खाने की परेशानी हो रही है.

लड़की के पिता ने याचिका में कहा है कि जिस तरह यूपी, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, पश्चिम बंगाल और असम की सरकारें कोटा में पढ़ने वाले अपने छात्रों को वापस लाई हैं उसी तरह बिहार सरकार भी अपने राज्य के छात्रों को वापस बुलाए, इसी पर हाईकोर्ट ने बिहार सरकार से जवाब मांगा था.

दूसरे राज्यों के छात्रों को घर जाता देख अब कोटा में रह रहे बिहार के छात्रों ने भूख हड़ताल शुरू कर दी है, बिहार के छात्र हॉस्टल में रहकर ही उपवास कर रहे हैं और हाथ में तख्तियां लेकर राज्य सरकार से घर बुलवाने की अपील कर रहे हैं. कोटा में बिहार समेत अन्य राज्यों के लगभग 22 से 25 हजार छात्र अभी भी फंसे हुए हैं.

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हाथों में 3 साल के बच्चे की लाश लेकर बदहवास भागती ये मां बिहार में स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली की गवाह है|

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देश में एक ओर कोरोना की महामारी ने देश को पटरी से उतार दिया, देश की स्वास्थ विभाग दिन रात मेहनत कर लोगो को बचाने की कोशिश क्र रही है. वही दूसरी ओर बिहार में स्वास्थ विभाग की अनदेखी सामने आई है, जिससे ३ साल की बच्चे की स्वास्थ सुविधा न मिलने से मौत हुई है.

बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार के १५ साल के शाशनकाल से स्वास्थ सेवाओं में कुछ भी बदलाव नहीं आया है|

हाथों में 3 साल के बच्चे की लाश लेकर बदहवास भागती ये मां बिहार में स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली की गवाह है। जहां एम्बुलेंस न मिलने की वजह से मासूम की जान चली गई। बच्चे को पहले अरवल से जहानाबाद रेफर किया, फिर जहानाबाद से पटना।

मरने के बाद शव ले जाने के लिए भी एम्बुलेंस नहीं मिली।

बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था छोटी बीमारियों पर भी दम तोड़ देती है

3 साल के बच्चे का शव हाथ में ले जाती माँ की तस्वीर सभ्य समाज पर तमाचा है,जिसका हम सब हिस्सा हैं

बिहार में तो डबल इंजन की सरकार है फिर भी इतनी बदनसीबी?

हाथों में 3 साल के बच्चे की लाश लेकर बदहवास भागती ये मां बिहार में स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली की गवाह है। जहां एम्बुलेंस न मिलने की वजह से मासूम की जान चली गई। बच्चे को पहले अरवल से जहानाबाद रेफर किया, फिर जहानाबाद से पटना। मरने के बाद शव ले जाने के लिए भी एम्बुलेंस नहीं मिली।

 

ट्विटर पे अब बिहार सरकार की काफी आलोचना हो रही है.

ट्विटर हैंडलर उमाशंकर सिंह लिखते है की "आदरणीय @नितीशकुमार  जी, आप कभी गर्व से महसूस कर पाते हैं कि आप 15 साल से बिहार के CM हैं? अगर इस माँ का क्रंदन सुनने के बाद भी आप गर्व से महसूस कर रहे हैं कि हाँ मैं अभी भी बिहार का CM हूँ तो इससे शर्मनाक कुछ नहीं हो सकता। सोने से पहले चेहरे पर पानी का छींटा मार कर पोंछ लीजिएगा।"

 

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Lockdown India: बीजेपी नेता ने तोडा लॉकडाउन, किया घर में शूटिंग

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इस मामले में पार्टी के नेता विश्व मोहन कुमार पर लॉकडाउन तोड़ने का केस दर्ज कर लिया गया है। जिसमें कहा गया है कि लॉकडाउन के बावजूद भारतीय जनत पार्टी के नेता ने अपने घर पर शूटिंग की अनुमति दी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शूटिंग के दौरान वहां सैकड़ों लोग इसे देख रहे थे। बता दें कि विश्व मोहन कुमार बिहार के सुपौल जिले के पिपरिया गांव के रहने वाले हैं। शूटिंग के दौरान भाजपा नेता अपने गांव में ही मौजूद थे।

इस मामले में यहां के एसएसपी ने फिल्म के निर्माता के खिलाफ केस दर्ज किया है। पुलिस ने शूटिंग में इस्तेमाल किये गये कैमरे को सीज कर लिया है। यह भी बात सामने आ रही है कि इस फिल्म को पिपरिया के अलावा अन्य गांवों में भी शूट किया गया है। पुलिस का कहना है कि जांच के बाद आरोपी पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

आपको बता दें कि पिछले कई दिनों से भोजपुरी फिल्म ‘इश्क दीवाना’ की शूटिंग चल रही है। 30 मार्च को फिल्म की शूटिंग रतौली गांव में हुई थी। यहां भी शूटिंग देखने के लिए सैकड़ों की संख्या में भीड़ जमा थी। जिसके बाद किसी ने सदर एसडीओ काओम अंसारी को इसके बारे में जानकारी दी। प्रशासन ने इस मामले में तुरंत कार्रवाई करते हुए इसकी जांच के आदेश दे दिया। एसडीओ ने बीडीओ और पिपरा के सीओ को मामले की जांच के आदेश दिए थे।

मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि पिपरा के बीडीओ ने इस मामले में सही जानकारी नहीं दी थी। लेकिन बार-बार गांव वालों की तरफ से शिकायत मिलने के बाद यहां के एसएसपी ने खुद मामले की जांच की और अब आगे की कार्रवाई की जा रही है। आपको बता दें कि विश्व मोहन कुमार सुपौली के कद्दावर नेता माने जाते हैं। वो यहां से सांसद भी रहे हैं। सांसद बनने से पहले वो बिहार सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं।

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