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Tag : Farmer Protest


टिकरी बॉर्डर पर बिछाई गई नुकीली कीलें, राहुल गांधी ने सरकार पर बोला हमला

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नई दिल्ली: केंद्र के नए कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली बॉर्डर पे चल रहे आंदोलन को किसान संगठन ने और तेज करने की तैयारी कर दी हैं. प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन स्थलों को किले में तब्दील कर दिया. 

जवानों की तैनाती बढ़ाने के साथ-साथ बेरिकेड की संख्या भी बढ़ा दी गई है. प्रदर्शन स्थलों और उसके आसपास के इलाकों में इंटरनेट बैन कर दिया गया है.  लोगों को पैदल चलने से रोकने के लिए कंटीले तार लगाए गए हैं. 

इस बीच, किसान यूनियनों ने 6 फरवरी को ‘चक्का जाम' करने की घोषणा की है.  आंदोलन स्थलों के निकट क्षेत्रों में इंटरनेट प्रतिबंध, अधिकारियों द्वारा कथित उत्पीड़न और अन्य मुद्दों के खिलाफ तीन घंटे तक राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों को अवरुद्ध कर अन्नदाता अपना विरोध दर्ज करायेंगे.

वही कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपने ट्वीट में पुलिस द्वारा किए गए कड़े सुरक्षा इंतजामों की तस्वीर साझा करते हुए लिखा, "भारत सरकार, पुलों का निर्माण करे, दीवारों का नहीं!"

https://twitter.com/RahulGandhi/status/1356455739510820865?s=19

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पीएम मोदी ने की किसानों से अपील, कृषि मंत्री तोमर ने किसानों को लिखी 8 पेज की चिट्ठी

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नई दिल्ली: देश में कृषि कानूनों के विरोध में पिछले 22 दिनों से दिल्ली के अलग अलग बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे किसानों के लिए केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने खुला पत्र लिखा है. आठ पन्नों के इस पत्र ने आज प्रदर्शनकारी किसानों के लिए भाजपा के बड़ी पहुंच के कार्यक्रम की शुरुआत की. पत्र एक पार्टी बैठक के बाद जारी किया गया था जिसमें उसके प्रमुख नेता केंद्रीय मंत्री अमित शाह, उनके कैबिनेट सहयोगियों पीयूष गोयल, निर्मला सीतारमण, नरेंद्र तोमर और पार्टी प्रमुख जेपी नड्डा ने भाग लिया था.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया, "कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर जी ने किसान भाई-बहनों को पत्र लिखकर अपनी भावनाएं प्रकट की हैं, एक विनम्र संवाद करने का प्रयास किया है. सभी अन्नदाताओं से मेरा आग्रह है कि वे इसे जरूर पढ़ें. देशवासियों से भी आग्रह है कि वे इसे ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं."

कृषि कानूनों को 'ऐतिहासिक' करार देते हुए तोमर ने कहा कि इन सुधारों को लेकर उनकी अनेक राज्यों के किसान संगठनों से बातचीत हुई है और कई किसान संगठनों ने इनका स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि वह इससे बहुत खुश हैं और किसानों में एक नई उम्मीद जगी है. उन्होंने ने कहा, ''देश के अलग-अलग क्षेत्रों से ऐसे किसानों के उदाहरण भी लगातार मिल रहे हैं, जिन्होंने नए कानूनों का लाभ उठाना शुरू भी कर दिया है.''

उन्होंने कहा कि इन कृषि सुधार कानूनों का दूसरा पक्ष ये है कि किसान संगठनों में एक भ्रम पैदा कर दिया गया है. उन्होंने कहा, ''देश का कृषि मंत्री होने के नाते मेरा कर्तव्य है कि हर किसान का भ्रम दूर करूं. मेरा दायित्व है कि सरकार और किसानों के बीच दिल्ली और आसपास के क्षेत्र में जो झूठ की दीवार बनाने की साजिश रची जा रही है उसकी सच्चाई और सही वस्तु स्थिति आपके सामने रखूं.''

कृषि मंत्री के 8 आश्वासन:
  1. किसानों की जमीन को खतरा नहीं, मालिकाना हक उन्हीं का रहेगा.
  2. किसानों को तय समय पर भुगतान किया जाएगा
  3. तय समय पर भुगतान नहीं करने पर जुर्माना लगेगा 
  4. खुले बाजार में अच्छे दाम पर फसल बेचने का विकल्प
  5. MSP जारी है और जारी रहेगी
  6. मंडियां चालू हैं और चालू रहेंगी
  7. करार फसलों के लिए होगा, जमीन के लिए नहीं, किसान जब चाहें करार खत्म कर सकते हैं
  8. APMC मंडियां कानून के दायरे से बाहर हैं
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सुप्रीम कोर्ट का सुझाव किसानों की नैतिक जीत है : AIKSCC

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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को किसान आंदोलन के मसले पर सुनवाई हुई. अदालत ने सरकार और किसानों की एक कमेटी बनाकर चर्चा करने को कहा है. इसपर गुरुवार को भी सुनवाई जारी रहेगी. दूसरी ओर किसानों ने दिल्ली-नोएडा बॉर्डर को फिर जाम कर दिया है.

पीएम खुद किसानों से बात करें: संजय राउत

किसान आंदोलन पर शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा कि सरकार अगर चाहती तो किसानों के साथ बैठकर आधे घंटे में यह मसला खत्म कर सकती है. प्रधानमंत्री खुद हस्तक्षेप करेंगे तो यह पांच मिनट में हल हो जाएगा. मोदी जी इतने बड़े नेता हैं उनकी बात सब लोग मानेंगे. आप (PM) खुद बात कीजिए, देखिए क्या चमत्कार होता है.

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

अदालत ने कहा है कि वो किसान संगठनों का पक्ष सुनेंगे, साथ ही सरकार से पूछा कि अबतक समझौता क्यों नहीं हुआ. अदालत की ओर से अब किसान संगठनों को नोटिस दिया गया है, अदालत का कहना है कि ऐसे मुद्दों पर जल्द से जल्द समझौता होना चाहिए. अदालत ने सरकार और किसानों के प्रतिनिधियों की एक कमेटी बनाने को कहा है, ताकि दोनों आपस में मुद्दे पर चर्चा कर सकें.

 सड़कें किसने बंद की है?

अदालत में वकील जीएस मणि ने कहा कि मैं किसान परिवार से आता हूं, इसलिए अपील की है. जिसपर अदालत ने उनसे जमीन के बारे में पूछा, वकील ने बताया कि उनकी ज़मीन तमिलनाडु में है. जिसपर चीफ जस्टिस ने कहा कि तमिलनाडु की स्थिति को पंजाब-हरियाणा से नहीं तोला जा सकता है. चीफ जस्टिस ने अदालत में कहा कि जो याचिकाकर्ता हैं, उनके पास कोई ठोस दलील नहीं है. ऐसे में रास्ते किसने बंद किए हैं. जिसपर सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि किसान प्रदर्शन कर रहे हैं और दिल्ली पुलिस ने रास्ते बंद किए हैं. जिसपर CJI ने कहा कि जमीन पर मौजूद आप ही मेन पार्टी हैं.

वकील ने दिया शाहीन बाग का हवाला

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने पूछा कि आप चाहते हैं बॉर्डर खोल दिए जाएं. जिसपर वकील ने कहा कि अदालत ने शाहीन बाग केस के वक्त कहा था कि सड़कें जाम नहीं होनी चाहिए. बार-बार शाहीन बाग का हवाला देने पर चीफ जस्टिस ने वकील को टोका, उन्होंने कहा कि वहां पर कितने लोगों ने रास्ता रोका था? कानून व्यवस्था के मामलों में मिसाल नहीं दी जा सकती है. चीफ जस्टिस ने सुनवाई के दौरान पूछा कि क्या किसान संगठनों को केस में पार्टी बनाया गया है.

सुप्रीम कोर्ट में शुरू हुई सुनवाई

दिल्ली की सीमा पर किसानों के आंदोलन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हो गई है. याचिकाकर्ता की ओर से सुप्रीम कोर्ट में शाहीन बाग केस का हवाला दिया गया. सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा कि ये एक महत्वपूर्ण विषय है. सॉलिसिटर जनरल ने अदालत से अपील की है कि हरीश साल्वे ऐसे ही एक मामले में दलील देना चाहते हैं. हालांकि, जज की ओर से हरीश साल्वे को बहस में शामिल करने से इनकार कर दिया गया.

दिल्ली-नोएडा बॉर्डर फिर बंद

किसानों ने एक बार फिर दिल्ली और नोएडा सीमा को बंद कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट में आज होने वाली सुनवाई से पहले किसानों ने अपने आंदोलन को धार दी है. कुछ दिन पहले नोएडा सीमा को खोला गया था, लेकिन अब दूसरे संगठन ने यहां मोर्चा संभाला है. 

सिद्धू ने उठाया इंश्योरेंस का मुद्दा

कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने एक बार फिर कृषि कानूनों के मसले पर सरकार पर निशाना साधा है. नवजोत सिद्धू ने वीडियो ट्वीट कर कहा कि इंश्योरेंस के नाम पर किसानों को लूटने का काम हो रहा है और कंपनियों को सीधा फायदा हो रहा है. पहले जब सरकारी कंपनी इंश्योरेंस करती थी, तबतक किसान को फायदा होता था. 

सरकार को किसान संगठनों का लिखित जवाब- संशोधन स्वीकार नहीं

बुधवार को संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से सरकार को लिखित में जवाब दिया गया है. किसान मोर्चा ने सरकार से अपील की है कि वो उनके आंदोलन को बदनाम ना करें और अगर बात करनी है तो सभी किसानों से एक साथ बात करें.

सरकार को किसान संगठनों का लिखित जवाब- संशोधन स्वीकार नहीं, आंदोलन को बदनाम ना करें  

 पीएम ने की अपील

किसानों और सरकार के बीच में गतिरोध जारी है. किसान संगठन पीछे नहीं हट रहे हैं और सरकार के सामने अपनी मांग पर अड़े हुए हैं. किसान आंदोलन को धार दे रहे हैं, अन्य राज्यों से भी दिल्ली किसान कूच कर रहे हैं. बुधवार को किसानों ने दिल्ली-नोएडा का चिल्ला बॉर्डर बंद करने की बात कही है.

दूसरी ओर पीएम मोदी ने एक बार फिर कृषि कानूनों को किसानों के लिए हितकारी बताया है. पीएम मोदी ने कहा है कि विपक्ष किसानों को डरा रहा है और भड़काने की कोशिश कर रहा है.

किसान आंदोलन पर सुप्रीम सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को किसान आंदोलन से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुनवाई होनी है. इनमें दिल्ली की सीमाओं पर भीड़ इकट्ठा करने, कोरोना वायरस के संकट को लेकर याचिका लगाई गई है. इसके अलावा किसान आंदोलन में मानवाधिकारों, पुलिस एक्शन और किसानों की मांग मानने की अपील की गई है. चीफ जस्टिस एस ए बोबडे, जस्टिस ए एस बोपन्ना और जस्टिस वी रामसुब्रमण्यम की बेंच सुनवाई करेगी.

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किसान आंदोलन के मद्देनजर बीजेपी सांसद सनी देओल को मिली Y श्रेणी की सुरक्षा, 11 जवान - 2 PSO रहेंगे साथ

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नई दिल्ली: पंजाब में जारी कृषि कानूनों के विरोध के बीच बीजेपी सांसद किया गया है. अब सनी देओल को Y श्रेणी की सुरक्षा दी गई है.

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भारतीय जनता पार्टी के सांसद और अभिनेता सनी देओल की सुरक्षा बढ़ाई है. सनी देओल को वाई श्रेणी की सुरक्षा दी गई है, यानी अब उनके साथ केंद्रीय सुरक्षा बलों की टीम मौजूद रहेगी.

गृह मंत्रालय के सूत्रों की मानें, तो आईबी की रिपोर्ट और सनी देओल को लेकर थ्रेट परसेप्शन के आधार पर ये सुरक्षा दी गई है. सनी देओल को जो Y श्रेणी की सुरक्षा मिली है, उसमें उनके साथ 11 जवान रहेंगे, इसके अलावा दो PSO भी मौजूद रहेंगे.

 सनी देओल पंजाब के गुरदासपुर से भारतीय जनता पार्टी के सांसद हैं. गुरदासपुर भारत और पाकिस्तान सीमा के निकट है, ऐसे में खतरा लगातार बना रहता है. सनी देओल की सुरक्षा ऐसे वक्त में बढ़ाई गई है, जब पंजाब में कृषि कानूनों का भारी विरोध हो रहा है. किसान संगठनों ने भी बीजेपी के नेताओं, मंत्रियों के घेराव की बात कही है. बीजेपी पंजाब, हरियाणा और उत्तर भारत के अन्य राज्यों में विरोध का सामना कर रही है.

सनी देओल पंजाब से ही आते हैं, ऐसे में लंबे वक्त तक कृषि कानून के मसले पर उनकी चुप्पी पर सवाल उठे थे. हालांकि, बाद में उन्होंने बयान जारी कर कहा था कि उनकी सरकार हमेशा किसानों के हक में फैसला लेती है, सरकार किसानों की बात सुनने को तैयार है और वो किसानों के साथ हैं.

सनी देओल के पिता और बॉलीवुड सुपरस्टार धर्मेंद्र ने भी ट्वीट कर किसानों के मसले पर चिंता व्यक्त की थी, धर्मेंद्र ने ट्वीट किया था कि ठंड के इस मौसम में किसान दिल्ली की सड़कों पर बैठे हैं, ऐसे में सरकार जल्द ही कुछ करे.

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किसानों के समर्थन में संत बाबा राम सिंह ने की खुदकुशी, राहुल बोले- मोदी सरकार की क्रूरता हर हद पार कर चुकी है

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नई दिल्ली: नरेंद्र मोदी सरकार के किसानों के लिए लाए गए तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन जारी है. बुधवार को इस आंदोलन के दौरान संत बाबा राम सिंह ने खुद को गोली मार कर आत्महत्या कर ली. किसानों को सरकार की ओर से प्रताड़ित किये जाने के बाद उन्होंने खुद को गोली मार ली, जिसके बाद उनकी मौत हो गई. आपको बता दें कि ये घटना हरियाणा के करनाल में बॉर्डर के पास हुई है. कहा जा रहा है कि संत बाबा राम सिंह किसानों पर सरकार के रवैये से आहत थे. उन्होंने खुद को गोली मारने से पूर्व एक सुसाइड नोट भी लिखा था.

उन्होंने किसान आंदोलन का जिक्र करते हुए उनके हक के लिए आवाज बुलंद की है. सुसाइड नोट के मुताबिक, संत बाबा राम सिंह ने किसानों पर सरकार के जुल्म के खिलाफ आत्महत्या की है. बाबा राम सिंह किसान थे और हरियाणा एसजीपीसी के नेता थे.

किसानों के समर्थन में संत बाबा राम सिंह ने की खुदकुशी
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संत बाबा राम सिंह ने सुसाइड नोट में लिखा है कि किसानों का दुख देखा. वो अपना हक लेने के लिए सड़कों पर हैं. बहुत दिल दुखा है. सरकार न्याय नहीं दे रही. जुल्म है. जुल्म करना पाप है, जुल्म सहना भी पाप है.

संत बाबा राम सिंह आगे लिखते हैं कि किसी ने किसानों के हक में और जुल्म के खिलाफ कुछ नहीं किया. कइयों ने सम्मान वापस किए. यह जुल्म के खिलाफ आवाज है. वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतेह.

संत बाबा राम सिंह की मौत पर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने दुख जताया है. राहुल गांधी ने बाबा राम सिंह को श्रद्धांजलि देने के साथ मोदी सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि कई किसान अपने जीवन की आहुति दे चुके हैं. मोदी सरकार क्रूरता की हर हद पार कर चुकी है.

राहुल गांधी ने ट्वीट किया कि करनाल के संत बाबा राम सिंह जी ने कुंडली बॉर्डर पर किसानों की दुर्दशा देखकर आत्महत्या कर ली. इस दुख की घड़ी में मेरी संवेदनाएं और श्रद्धांजलि. कांग्रेस सांसद ने आगे लिखा कि कई किसान अपने जीवन की आहुति दे चुके हैं. मोदी सरकार क्रूरता की हर हद पार कर चुकी है. जिद छोड़ो और तुरंत कृषि विरोधी कानून वापस लो.

बता दें कि कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन के कारण अभी तक कई किसान अपनी जान गंवा चुके हैं. सोमवार को दो, मंगलवार को एक किसान और अब बुधवार को संत बाबा राम सिंह की मौत हुई है. सोमवार की देर रात को पटियाला जिले के सफेद गांव में एक सड़क हादसा हो गया था, जिसमें दिल्ली से धरना देकर लौट रहे दो किसानों की मौत हो गई थी.

रामसिंह करनाल के पास नानकसर गुरुद्वारा साहिब से थे. राम सिंह ने कथित सुसाइड नोट भी छोड़ा है. उन्होंने लिखा- “किसानों का दुख देखा, अपने हक लेने के लिए सड़कों पर हैं. दिल बहुत दुखी हुआ,  सरकार न्याय नहीं दे रही,  जुल्म है,  जुल्म करना पाप है,  जुल्म  सहना भी पाप है. किसी ने किसानों के हक में और जुल्म के खिलाफ कुछ किया... कईयों ने सम्मान वापस किए, पुरस्कार वापस करके रोष जताया.....यह जुल्म के खिलाफ आवाज है और मजदूर किसान के हक में आवाज है.”

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